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Tuesday, September 27, 2011

गूगल ने आखिर किस भारतीय को बना दिया अरबपति जाने ?

इंटरनेट सर्च की सबसे बड़ी कंपनी गूगल ने एक भारतीय को अरबपति बना दिया है। कंपनी ने अमेरिका की मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी मोटोरोला मोबिलिटी को खरीदने के बाद उसके भारतीय मूल के सीईओ की विदाई कर दी। लेकिन यह विदाई भी ऐसी-वैसी नहीं थी। गूगल के मोटोरोला के सीईओ संजय झा को गोल्डन पैराशूट मुआवजा दिया और यह कोई मामूली मुआवजा नहीं था। गूगल ने उन्हें 6 करोड़ 66 लाख डॉलर यानी 313 करोड़ रुपए दिए। इसमें से 1 करोड़ 32 लाख डॉलर नकद दिए और 5 करोड़ 24 लाख 70 हजार डॉलर के शेयर दिए। यह नकद राशि उनकी बेसिक सैलरी का तीन गुना है। संजय झा मोटोरोला के सेलफोन डिवीजन के हेड थे। उस समय कंपनी के शेयर भी दिए गए थे। गूगल को उम्मीद है कि मोटोरोला को खरीदने के बाद वह हैंडसेट व्यवसाय में भी बाजी मारेगी और ऐप्पल को टक्कर देगी। अगली पोस्ट में देखे की केसे होगे अब हर बच्चे मैथ में आगे

Saturday, September 17, 2011

डाकू से सांसद बनी फूलन देवी की कहानी

फूलन देवी (10 अगस्त 1963 - 25 जुलाई 2001) डकैत से सांसद बनी एक भारत की एक राजनेता थीं। एक निम्न जाति में उनका जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव गोरहा का पूर्वा में हुआ था। फूलन की शादी ग्यारह साल की उम्र में हुई थी लेकिन उसके पति और पति के परिवार ने उसे छोड़ दिया था। बहुत तरह की प्रताड़ना और कष्ट झेलने के बाद फूलन का झुकाव डकैतों की तरफ हुआ था। धीरे धीरे फूलन ने अपने खुद का एकज्ज्ज गिरोह खड़ा कर लिया और उसकी नेता बन बैठी। आमतौर पर फूलन को डकैत के रूप में राबिनहुड की तरह गरीबों का पैरोकार समझा जाता था। सबसे पहली बार 1981 में वह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियों में तब आई जब उसने ऊँची जातियों के बाइस लोगों का एक साथ तथाकथित नरसंहार किया जो ठाकुर जाति के ज़मींदार लोग थे। लेकिन बाद में उसने इस नरसंहार से इन्कार किया था। बाद में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार तथा प्रतिद्वंदी गिरोहों ने फूलन को पकड़ने की बहुत सी नाकाम कोशिशे की। इंदिरा गाँधी की सरकार ने 1983 में उनसे समझौता किया की उसे मृत्यु दंड नहीं दिया जायेगा और उसके परिवार के सदस्यों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जायेगा और फूलन ने इस शर्त के तहत अपने दस हजार समर्थकों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। बिना मुकदमा चलाये ग्यारह साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रिहा कर दिया। ऐसा उस समय हुआ जब दलित लोग फूलन के सम्र्थन में गोलबंद हो रहे थे और फूलन इस समुदाय के प्रतीक के रुप में देखी जाती थी। फूलन ने अपनी रिहाई के बौद्ध धर्म में अपना धर्मातंरण किया। 1996 में फूलन ने लोकसभा का चुनाव जीता और वह संसद पहुँची। 25 जुलाई सन 2001 को दिल्ली में उनके आवास पर फूलन की हत्या कर दी गयी। उसके परिवार में सिर्फ़ उसके पति उम्मेद सिंह हैं। 1994 में शेखर कपूर ने फूलन पर आधारित एक फिल्म बैंडिट क्वीन बनाई जो काफी चर्चित और विवादित रही। फूलन ने इस फिल्म पर बहुत सारी आप्त्तियाँ दर्ज कराईं और भारत सरकार द्वारा भारत में इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गयी।फुलन के साथ जमिदारो ने बलात्कार किया था | अगली पोस्ट में देखे की केसे बनाये अपने बच्चो को मैथ में आगे जानने के लिए देखे अगली पोस्ट !

Wednesday, August 10, 2011

महान क्रन्तिकारी चंद्रशेखर आजाद यहाँ भी !


आज में आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने वाला हू !जिसके बारे में सायद ही आप जानते हो यहाँ पर् इतिहास के उस दिन की याद आज भी मोजूद है !में बात कर हू बुंदेलखंड में जिला पन्ना में जो हीरो के लिए प्रसिद है!यहाँ पर् ४ सितम्बर 1929 को स्वतंत्रता सेनानी श्री चंद्रशेखर की अध्यक्षता में क्रांतिकारियो की बैठक सम्पन हुई थी !इस बैठक का आयोजन पंडित राम सहाय तिवारी ने किया था !इसमें जिला टीकमगढ़ के श्री नारायणदास खरे व प्रेम नारायण और सरीला के निवासी विहारी लाल और महोबा के निवासी जय नारायण और झाँसी के चार अन्य लोगो ने इस बैठक में भाग लिया था !यह जगह बहुत घने जंगल में आज भी मोजूद है जहा पर् पांडव फोल नाम का जल प्रपात भी है !यह जगह पन्ना टाइगर रिजर्व के पास ही है !जहा पर् चन्द्रशेखर जी की प्रतिमा भी बनी हुई है !

Monday, July 25, 2011

क्यों कराना चाहती है फ्रीडा पिंटो अपना डीएनए टेस्ट




आस्कर विजेता फिल्म की नायिका फ्रीडा आखिर क्यों करना चाहती है !अपना डीएनए टेस्ट आइये आपको बता दे

अपने पूर्वजों का इतिहास जानने के लिए भायतीय मूल की अदाकारा फ्रीडा पिंटो अपना डीएनए टेस्ट कराने वाली हैं। 2008 में फिल्म "स्लमडॉग मिलेनियर" से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करने वाली 26 वर्षीय फ्रीडा को लगने लगा है कि उनके पूर्वजों का संबंध पुर्तगाल से हो सकता है।

फ्रीडा के मुत‌ाबिक पुर्तगाल के लोग उन्हें देखकर कहते हैं कि मैं उनके जैसी दिखती हूं। लेकिन फ्रीडा को गैर भारतीय कहलाना कतई अच्छा नहीं लगता।
पिंटो कहती है कि जब वह इस्तान्बुल गई थीं तो महिलाओं के एक समूह ने पिंटो नाम की वजह से उन्हें पुर्तगाली समझ लिया था। इस बस के बावजूद
फ्रीडा अपने पूर्वजों के बारे में जड़ाजानने के लिए उत्सुक ह
डीएनए टेस्ट कराने के पीछे फ्रीडा का मुख्य मकसद लोगों के बीच फैला भ्रम है। फ्रीडा जब कभी विदेश में धूमने जाती हैं तो ज्यादातर लोग उसके मूल निवास के बारे में गलत सोचते हैं। लोगों को यह यकीन नहीं होता कि फ्रीडा भारतीय हैं। मालूम हो कि फ्रीडा दक्षिण भारत के मंगलौर की रहने वाली हैं। फ्रीडा ने कहा कि वह भारतीय संस्कृति से संबंध रखने वाली हिंदू लड़की है लेकिन फिर भी डीएनए टेस्ट जरूर कराना चाहेंगी।

Wednesday, July 20, 2011

आखिर कहा से आया समोसा


समोसा दक्षिण एशिया का एक लोकप्रिय व्यंजन है। इस लज़ीज़ त्रिभुजाकार व्यंजन को आटा या मैदा के साथ आलू के साथ बनाया जाता है और चटनी के साथ परोसा जाता है। ऐसा माना जाता है कि समोसे की उत्पत्ति उत्तरी भारत में हुई ऑर फिर यह धीरे-धीरे पूरे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित आस-पास के क्षेत्रों में भी काफी लोकप्रिय हुआ। यह भी माना जाता है कि समोसा मध्यपूर्व से भारत आया और धीरे-धीरे भारत के रंग में रंग गया। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि दसवीं शताब्दी में मध्य एशिया में समोसा एक व्यंजन के रूप में सामने आया था। 13-14वीं शताब्दी में व्यापारियों के माध्यम से समोसा भारत पहुँचा। महान कवि अमीर खुसरो (1253-1325) ने एक जगह जिक्र किया है कि दिल्ली सल्तनत में उस दौरान स्टड मीट वाला घी में डीप फ्राई समोसा शाही परिवार के सदस्यों व अमीरों का प्रिय व्यंजन था। १४ वीं शताब्दी में भारत यात्रा पर आये इब्नबतूता ने मो0 बिन तुगलक के दरबार का वृतांत देते हुए लिखा कि दरबार में भोजन के दौरान मसालेदार मीट, मंूगफली और बादाम स्टफ करके तैयार किया गया लजीज समोसा परोसा गया, जिसे लोगों ने बड़े चाव से खाया। यही नहीं 16वीं शताब्दी के मुगलकालीन दस्तावेज आईने अकबरी में भी समोसे का जिक्र बकायदा मिलता है।

समोसे का यह सफर बड़ा निराला रहा है। समोसे की उम्र भले ही बढ़ती गई पर पिछले एक हजार साल में उसकी तिकोनी आकृति में जरा भी परिवर्तन नहीं हुआ। आज समोसा भले ही शाकाहारी-मांसाहारी दोनों रूप में उपलब्ध है पर आलू के समोसों का कोई सानी नहीं है और यही सबसे ज्यादा पसंद भी किया जाता है। इसके बाद पनीर एवं मेवे वाले समोसे पसंद किये जाते हैं। अब तो मीठे समोसे भी बाजार में उपलब्ध हैं। समोसे का असली मजा तो उसे डीप फ्राई करने में है, पर पाश्चात्य देशों में जहाँ लोग कम तला-भुना पसंद करते हैं, वहां लोग इसे बेक करके खाना पसंद करते हैं। भारत विभिन्नताओं का देश है, सो हर प्रांत में समोसे के साथ वहाँ की खूबियाँ भी जुड़ती जाती हैं। उ0प्र0 व बिहार में आलू के समोसे खूब चलते हैं तो गोवा में मांसाहारी समोसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। पंजाबी समोसा खूब चटपटा होता है तो चाइनीज क्यूजीन पसंद करने वालों के लिए नूडल्स स्टड समोसे भी उपलब्ध हैं। बच्चों और बूढ़ों दोनों में समोसे के प्रति दीवानगी को भुनाने के लिए तमाम बहुराष्ट्रीय कम्पनियां इसे फ्रोजेन फूड के रूप में भी बाजार में प्रस्तुत कर रही हैं।

Wednesday, June 29, 2011

भारत क्यों है ऐसा


भारत एक ऐसा देश जहा कहा जाता है!की सभी नागरिक समान है !और सभी को सामान अधिकार है !और यहाँ पर् नागरिको के अधिकारों के लिए मोलिक अधिकार भी बनाये गए है !जिनका पालन होता है !और यहाँ पर् शिक्षा का अधिकार प्रत्येक बच्चे को दिया गया है !साथ ही साथ बाल श्रम के विरोध में कानून बनाया गया है!और यहाँ पर् सभी को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है !यह सब कहना है सविधान में लिखे लेखो का!
पर् क्या ऐसा होता है क्या आपको अपनी बात कहने की स्वतंत्रता मिलती है !आपको अपनी बात कहने की स्वतंत्रता तो मिलती होगी पर् सायद अपनी बात कहने के बाद आपको सुरक्षा के लिए भागना पड़ता हो !आज के समय में आपके पास कई ऐसे उदहारण है !जो सविधान के इन लेखो के साथ साथ सरकार की भी पोल खोल रही है!जैसे आजकल पर् आप सोच रहे होगे की इन बातो पर् मीडिया भी जोर क्यों नहीं देता !तो में आपको बता दू आज कल मीडिया भी भ्रष्ट लोगो के हाथो बिक चूका है !तभी तो सायद ऐसे राज्य जहा पर् सायद शिक्षा गावो तक ना पहुच पाई हो पर् कुछ चेनलो पर् सरकार की झूठी तारीफ की जाती है जो सायद कभी कभी आधे य एक घंटे तक चलती है !और सरकार कई तरह के कानून बनाती है की जनता की आवाज़ सीधी सरकार तक पहुचे पर् सायद जनता की आवाज़ जिला के कलेक्टर तक ही नहीं पहुच पाती है !क्यों की एक आम आदमी को क्ल्लेक्टेर के पास अपनी बात कहने के लिए जाने तक नहीं दिया जाता !अरे भाई उनके बॉडीगार्ड जो उनके साथ लगे रहते है! वे कलेक्टर साहब की रक्षा ठीक उसी तरह करते है !जैसे मधुमखी अपने छाते की करती है ! क्यों की मेरे हिसाब से सायद यहाँ कानून आम लोगो के लिए ही बस होता है !
और हा मेरा एक सवाल जो सायद आप लोग बता पाए की आजकल भारत में योग्य आदमी की जगह अयोग्य आदमी ही शासन में क्यों लिए जा रहे है !यह बात मेरी समझ में नहीं आती इसे आप ही बता सके !
और हा अंत में एक गाना आपके लिए जो इस देश की व इस देश के नेताओ के बारे कुछ कह रहा है !तो आप सुन ले !

Wednesday, May 25, 2011

ओसामा बिन लादेन का जीवन परिचय


ओसामा बिन लादेन


सऊदी अरब के एक धनी परिवार में दस मार्च 1957 में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन, अमरीका पर 9/11 के हमलों के बाद दुनिया भर में चर्चा में आए.वे मोहम्मद बिन लादेन के 52 बच्चों में से 17वें थे. मोहम्मद बिन लादेन सऊदी अरब के अरबपति बिल्डर थे जिनकी कंपनी ने देश की लगभग 80 फ़ीसदी सड़कों का निर्माण किया था.
जब ओसामा के पिता की 1968 में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई तब वे युवावस्था में ही करोड़पति बन गए. सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला अज़ीज़ विश्वविद्यालय में सिविल इंज़ीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान वे कट्टरपंथी इस्लामी शिक्षकों और छात्रों के संपर्क में आए.
अनेक बहसों और अध्ययन के बाद वे पश्चिमी देशों में मूल्यों के पतन के ख़िलाफ़ और इस्लाम के कट्टरपंथी गुटों के समर्थन में खड़े हो गए. इससे पहले अपने परिवार के साथ युरोप में मनाई गई छुट्टियों की तस्वीरों में ओसामा को फैशनेबल कपड़ों में भी देखा गया था.
दिसंबर 1979 में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला किया तो ओसामा ने आरामपरस्त ज़िदंगी को छोड़ मुजाहिदीन के साथ हाथ मिलाया और शस्त्र उठा लिए.
अफ़ग़ानिस्तान में अरब लोगों के साथ मिलकर अभियान करते वक्त ही उन्होने अल कायदा के मूल संगठन की स्थापना कर ली थी. अफ़ग़ानिस्तान में मुजाहिदीन का साथ देने के बाद जब वो वापस साऊदी अरब पहुँचे तो उन्होंने साऊदी अरब के शासकों का विरोध किया. ओसामा का मानना था कि साऊदी अरब के शासकों ने ही अमरीकी सेना को साऊदी ज़मीन पर आने के लिए आमंत्रित किया था. मध्य पूर्व में अमरीकी सेना की मौज़ूदगी से नाराज़ ओसामा बिन लादेन ने 1998 में अमरीका के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी थी.
वर्ष 1994 में अमरीकी दबाव के कारण सऊदी अरब में उनकी नागरिकता ख़त्म कर दी थी और उसके बाद वे सूडान और फिर जनवरी 1996 में दोबारा अफ़ग़ानिस्तान मे पहुँच गए. ग़ौरतलब है कि वर्ष 1998 में ही कीनिया और तंज़ानिया में अमरीकी दूतावासों में हुए दो बम धमाकों में 224 लोग मारे गए और 5000 घायल हुए. अमरीका ने ओसामा और उनके 16 सहयोगियों को प्रमुख संदिग्ध बताया.
इसके बाद अमरीका ओसामा को दुश्मन के रूप में देखने लगा और ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई की मोस्ट वॉंटिड लिस्ट में उन्हें पकड़ने या मारने के लिए 2.5 करोड़ डॉलर के पुरस्कार की घोषणा की गई. पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में छह प्रशिक्षण शिविरों पर अमरीका ने ओसामा को मारने के मक़सद से 75 क्रूज़ मिसाइल दागे. लेकिन एक घंटे की देरी से उनका निशाना चूक गया.
अफ़्रीका में बम घटनाओं के साथ-साथ अमरीका ने उन्हें 1993 के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में बम धमाके, 1995 में रियाद में कार बम धमाके, सऊदी अरब में ट्रक बम हमले का दोषी पाया.
रविवार डॉट कॉम के अनुसारसऊदी अरब में एक यमन परिवार में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के ख़िलाफ़ लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 1979 में सऊदी अरब छोड़ दिया. अफगानी जेहाद को जहाँ एक ओर अमरीकी डॉलरों की ताक़त हासिल थी वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब और पाकिस्तान की सरकारों का समर्थन था. मध्य पूर्वी मामलों के विश्लेषक हाज़िर तैमूरियन के अनुसार ओसामा बिन लादेन को ट्रेनिंग सीआईए ने ही दी थी.
अफ़ग़ानिस्तान में उन्होंने मक्तब-अल-ख़िदमत की स्थापना की जिसमें दुनिया भर से लोगों की भर्ती की गई और सोवियत फ़ौजों से लड़ने के लिए उपकरणों का आयात किया गया.
मौत-
पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में हुए अमरीकी सेना के अभियान में 2 मई 2011 को उन्हें मार डाला गया. ओसामा बिन लादेन की मौत के 12 घंटे के बाद अमरीका के विमान वाहक पोत यूएसएस कार्ल विन्सन पर शव को एक सफ़ेद चादर में लपेट कर एक बड़े थैले में रखा गया और फिर अरब सागर में उतार दिया गया. यह सब ब्रितानी समयानुसार सुबह छह बजे हुआ. अमरीकी अधिकारी समुद्र मेंसीबीएस न्यूज़ के मुताबिक, सऊदी अरब ने शव लेने से इनकार कर दिया था. अगर यह बात सही है तो इसका मतलब उन्हें यह प्रस्ताव दिया गया था और अगर सऊदी अरब ओसामा को अपने यहाँ कहीं दफ़ना देता तो क़ब्र को मज़ार बनते देर नहीं लगती.
उसके मारे जाने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को याद करते हुये कहा कि जैसा बुश ने कहा था हमारी जंग इस्लाम के खिलाफ नहीं है. लादेन को पाकिस्तान में इस्लामाबाद के एक कंपाउंड में मारा गया. एक हफ्ते पहले हमारे पास लादेन के बारे में पुख्ता जानकारियां मिल गई थीं. उसने बाद ही कंपाउंड को घेरकर एक छोटे ऑपरेशन में लादेन को मार गिराया गया.
बराक ओबामा ने कहा कि लादेन ने पाक के खिलाफ भी जंग छेड़ी थी. हमारे अधिकारियों ने वहां के अधिकारियों से बात कि और वह भी इसे एक ऐतिहासिक दिन मान रहे हैं. यह 10 साल की शहादत की उपलबधि है. हमने कभी भी सुरक्षा से समझौता नहीं किया. अल कायदा से पीड़ित लोगों से मैं कहूंगा कि न्याय मिल चुका है.
9/11 के सकता है. पैसे और ताकत से नहीं बल्कि एकजुटता ही हमारी शक्ति है.